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ईडी का कोर्ट में बड़ा खुलासा, कोटक महिंद्रा बैंक घोटाले में मास्टरमाइंड है पुष्पेंद्र सिंह

घोटाले के पैसों से खरीदी BMW और थार, 9 जून तक ईडी हिरासत में भेजा गया

Satyakhabarindia

 

सत्य खबर हरियाणा

Kotak Mahindra Bank Scam : प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पंचकूला की विशेष अदालत में एक चौंकाने वाला खुलासा किया है। आरोपी पुष्पेंद्र सिंह ने सह-आरोपियों के जरिए 33 करोड़ रुपये हासिल कर लग्जरी गाड़ियों और संपत्तियों की खरीद की थी। घोटाले का पर्दाफाश होने से ठीक पहले उसने यह गाड़ियां और अचल संपत्ति को बेच दिया था। अदालत ने पुष्पेंद्र सिंह को 9 जून तक ईडी की रिमांड पर भेजा है।

पंचकूला के कोटक महिंद्रा बैंक में हुए 150 करोड़ रुपये के घोटाले का कथित मास्टरमाइंड बैंक का ही डिप्टी वाइस प्रेसिडेंट (वीपी) पुष्पेंद्र सिंह है। ईडी के मुताबिक, पुष्पेंद्र ने पंचकूला नगर निगम (एमसी) के खातों से हेराफेरी कर करोड़ों रुपये निकाले और उन पैसों से बीएमडब्ल्यू 7 सीरीज, थार जैसी लग्जरी गाड़ियां व अचल संपत्तियां खरीदीं। हालांकि, मार्च 2026 में घोटाले का भंडाफोड़ होने से पहले ही उसने ये सारी संपत्तियां बेच दी थीं। ईडी के अनुसार पुष्पेंद्र सिंह बैंक गाड़ियों का शौकीन है।

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हरियाणा राज्य सतर्कता और भ्रष्टाचार रोधी ब्यूरो (SV&ACB) ने इस मामले में 24 मार्च 2026 को एफआईआर दर्ज की थी, जिसके बाद ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग (PMLA) के तहत जांच शुरू की। जिस समय यह घोटाला हुआ, उस वक्त पुष्पेंद्र सिंह कोटक महिंद्रा बैंक की पंचकूला शाखा का मैनेजर था।

कैसे किया घोटाला

ईडी ने पीएमएलए कोर्ट को बताया कि पंचकूला नगर निगम के दो बैंक खाते फर्जी दस्तावेजों के आधार पर खोले गए थे। जांच एजेंसी के अनुसार, इन खातों से सह-आरोपी रजत डाहरा को 88.17 करोड़ रुपये, स्वाति तोमर को 31.58 करोड़, कपिल कुमार को 2.36 करोड़ और विनोद कुमार को 1.41 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए गए।

पूछताछ में कपिल कुमार और स्वाति तोमर ने ईडी को बताया कि रजत डाहरा ने नौकरी और काम का झांसा देकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाए थे। स्वाति के मुताबिक, पुष्पेंद्र सिंह और उसकी पत्नी प्रीति ठाकुर के प्रभाव में आकर उसने पीएनबी, आईसीआईसीआई और आईडीएफसी बैंक में खाते खोले। इसके बाद डाहरा ने उनसे ब्लैंक चेक, एटीएम कार्ड और सिम कार्ड अपने पास रख लिए। स्वाति ने साफ किया कि उसने कभी पुष्पेंद्र या उसके साथियों को कोई कर्ज नहीं दिया।

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रजत डाहरा ने ईडी के सामने खुलासा किया कि पुष्पेंद्र सिंह उसे व्हाट्सएप के जरिए पैसों के ट्रांसफर के निर्देश देता था। डाहरा के मुताबिक, पुष्पेंद्र ने उसके नाम पर बीएमडब्ल्यू 7 सीरीज, थार, स्कॉर्पियो-एन और इंडियन मोटरसाईकिल खरीदीं, जिनका इस्तेमाल पुष्पेंद्र और उसकी पत्नी करते थे। मार्च 2026 में पुष्पेंद्र ने ये सभी गाड़ियां बेच दीं और पैसे खुद रख लिए। डाहरा ने यह भी बताया कि उसने मार्च 2026 में पुष्पेंद्र को 1 करोड़ रुपये नकद भी दिए थे और उसके फोन भी पुष्पेंद्र ने नष्ट कर दिए थे।

ईडी ने नगर निगम के पूर्व लेखा अधिकारी विकास कौशिक का बयान भी कोर्ट में पेश किया। कौशिक ने बताया कि बैंक और निगम के बीच सारा काम पुष्पेंद्र सिंह और रिलेशनशिप मैनेजर दिलीप कुमार राघव देखते थे। पुष्पेंद्र को निगम के खातों के हर लेन-देन की पूरी जानकारी थी और उसने इस घोटाले में मदद के लिए कौशिक को वित्तीय प्रलोभन भी दिया था।

ईडी के मुताबिक, पुष्पेंद्र ने माना है कि 2020 से 2023 के बीच उसे रजत डाहरा और स्वाति तोमर से 33 करोड़ रुपये मिले, जिनसे उसने लग्जरी संपत्तियां खरीदीं। बचाव पक्ष के वकील दीपांशु बंसल ने रिमांड का विरोध करते हुए कहा कि उनके मुवक्किल के मौलिक अधिकारों का हनन हुआ है। लेकिन अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद, घोटाले के असली लाभार्थियों और रकम का पता लगाने के लिए पुष्पिंदर सिंह को 9 जून तक ईडी की हिरासत में भेज दिया है।

निगम के खातों से किसे कितना पैसा हुआ ट्रांसफर

ईडी के अनुसार रजत डाहरा के खाते में 88.17 करोड़ रुपये, स्वाति तोमर के खाते में 31.58 करोड़ रुपये, कपिल कुमार के खाते में 2.36 करोड़ रुपये और विनोद कुमार के खाते में 1.41 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए गए थे।

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